{"product_id":"मानसरोवर-की-31-श्रेष्ट-कहानियाँ-by-munshi-premchand-hindi-edition-paperback","title":"मानसरोवर की 31 श्रेष्ट कहानियाँ By Munshi Premchand (Hindi Edition) Paperback","description":"\u003ch3\u003e\u003cspan\u003eAbout the Author\u003c\/span\u003e\u003c\/h3\u003e\n\u003cdiv class=\"a-section a-spacing-small a-padding-small\"\u003e\u003cspan\u003eप्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई, 1880 को वाराणसी के निकट लम्ही ग्राम में हुआ था। उनके पिता अजायब राय पोस्ट ऑफ़िस में क्लर्क थे। वे अजायब राय व आनन्दी देवी की चौथी संतान थे। पहली दो लड़कियाँ बचपन में ही चल बसी थीं। तीसरी लड़की के बाद वे चौथे स्थान पर थे। माता पिता ने उनका नाम धनपत राय रखा।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eसात साल की उम्र से उन्होंने एक मदरसे से अपनी पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत की जहाँ उन्होंने एक मौलवी से उर्दू और फ़ारसी सीखी। जब वे केवल आठ साल के थे तभी लम्बी बीमारी के बाद आनन्दी देवी का स्वर्गवास हो गया। उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली परंतु प्रेमचंद को नई माँ से कम ही प्यार मिला। धनपत को अकेलापन सताने लगा।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eकिताबों में जाकर उन्हें सुकून मिला। उन्होंने कम उम्र में ही उर्दू, फ़ारसी और अँग्रेज़ी साहित्य की अनेकों किताबें पढ़ डालीं। कुछ समय बाद उन्होंने वाराणसी के क्वींस कॉलेज में दाख़िला ले लिया।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e1895 में पंद्रह वर्ष की आयु में उनका विवाह कर दिया गया। तब वे नवीं कक्षा में पढ़ रहे थे। लड़की एक सम्पन्न ज़मीदार परिवार से थी और आयु में उनसे बढ़ी थी। प्रेमचंद ने पाया कि वह स्वभाव से बहुत झगड़ालू है और कोई ख़ास सुंदर भी नहीं है। उनका यह विवाह सफ़ल नहीं रहा। उन्होंने विधवा-विवाह का समर्थन करते हुए 1906 में बाल-विधवा शिवरानी देवी से दूसरा विवाह कर लिया। उनकी तीन संताने हुईं–श्रीपत राय, अमृत राय और कमला देवी श्रीवास्तव।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e1897 में अजायब राय भी चल बसे। प्रेमचंद ने जैसे-तैसे दूसरे दर्जे से मैट्रिक की परीक्षा पास की। तंगहाली और गणित में कमज़ोर होने की वजह से पढ़ाई बीच में ही छूट गई। बाद में उन्होंने प्राइवेट से इंटर व बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eवाराणसी के एक वकील के बेटे को 5 रु. महीना पर ट्यूशन पढ़ाकर ज़िंदगी की गाड़ी आगे बढ़ी। कुछ समय बाद 18 रु. महीना की स्कूल टीचर की नौकरी मिल गई। सन् 1900 में सरकारी टीचर की नौकरी मिली और रहने को एक अच्छा मकान भी मिल गया।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eधनपत राय ने सबसे पहले उर्दू में ‘नवाब राय’ के नाम से लिखना शुरू किया। बाद में उन्होंने हिंदी में प्रेमचंद के नाम से लिखा। प्रेमचंद ने 14 उपन्यास, 300 से अधिक कहानियाँ, नाटक, समीक्षा, लेख, सम्पादकीय व संस्मरण आदि लिखे। उनकी कहानियों का अनुवाद विश्व की अनेक भाषाओं में हुआ है। प्रेमचंद ने मुंबई में रहकर फ़िल्म ‘मज़दूर’ की पटकथा भी लिखी।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003eप्रेमचंद काफ़ी समय से पेट के अलसर से बीमार थे, जिसके कारण उनका स्वास्थ्य दिन-पर-दिन गिरता जा रहा था। इसी के चलते 8 अक्तूबर, 1936 को क़लम के इस सिपाही ने सब से विदा ले ली\u003c\/span\u003e\u003c\/div\u003e","brand":"The Indian Book Store","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45925959893128,"sku":null,"price":499.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0590\/3830\/2344\/files\/d398c7af-b2ec-4a57-8f55-b5b5f5892d9e.jpg?v=1780404230","url":"https:\/\/www.theindianbookstore.in\/products\/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-31-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%81-by-munshi-premchand-hindi-edition-paperback","provider":"The Indian Book Store","version":"1.0","type":"link"}